उत्तर प्रदेश सरकार हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार के लिहाज से अहम माना जा रहा है, लेकिन इसके लागू होने से पहले से कार्यरत लाखों शिक्षकों में चिंता और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इनमें से कई शिक्षक दशकों से सेवा में हैं और अब नौकरी तथा प्रमोशन को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। ऐसे में, उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षक वर्ग को राहत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल करने का फैसला लिया है।
टीईटी आदेश का संदर्भ और उसके प्रभाव
डिजिटल शिक्षा और सरकारी नीतियों के बदलते स्वरूप में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश टीईटी की महत्ता को रेखांकित करता है। शिक्षकों के लिए यह एक नई चुनौती और साथ ही अवसर भी है क्योंकि यह उन्हें अपनी योग्यताओं को सिद्ध करने के लिए प्रेरित करता है। हालांकि, ज्यादातर सेवारत शिक्षक जिनके कई वर्ष की सेवा बाकी है, वे टीईटी की अनिवार्यता से चिंतित हैं क्योंकि इससे उनकी नौकरी खतरे में पड़ सकती है और प्रमोशन के रास्ते बंद हो सकते हैं।
इस आदेश के बाद शिक्षकों में तनाव बढ़ा है और कई संगठन तथा शिक्षक प्रतिनिधि इस फैसले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। शिक्षक संघ और जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार का रुख और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों की बढ़ती चिंता को समझते हुए आधारभूत शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल करे। सरकार का मानना है कि जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं, उनकी लंबे समय की सेवा, अनुभव और योग्यता को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी ने सोशल मीडिया पर भी यह जानकारी दी कि सरकार जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी, जिससे लाखों शिक्षकों को उस बोझ से राहत मिल सके जो टीईटी अनिवार्यता के कारण उन पर पड़ा है। साथ ही कहा कि प्रदेश में शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता रहा है, जिससे उनकी दक्षता बनी रहती है।

टीईटी अनिवार्यता के विरोध और चुनौती
शिक्षकों की चिंता और विरोध के पीछे उनके अनुभव और सेवा के वर्षों को नजरअंदाज करना है। जिसकी वजह से शिक्षक संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से इसके खिलाफ कड़ा कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई शिक्षकों की सेवा अवधि में कुछ साल ही शेष हैं, जिनके लिए टीईटी पास करना कठिन हो सकता है।
शिक्षकों के साथ ही उनके परिवार भी इस निर्णय से प्रभावित हैं, कई जिलों में शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ विरोध कर रहे हैं और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
सरकार की तैयारी और आगे की संभावना
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन के साथ शिक्षकों के पक्ष में मजबूत दलीलें प्रस्तुत करने की रणनीति तैयार की है। यह दलीलें शिक्षकों के अनुभव, सेवा और योग्यता पर आधारित होंगी। यदि कोर्ट से राहत मिलती है, तो इससे न केवल लाखों शिक्षकों को नौकरी की सुरक्षा मिलेगी बल्कि शिक्षा विभाग के अंदर भी सकारात्मक माहौल बनेगा।
सरकार के समर्थन से शिक्षक वर्ग ने राहत की सांस ली है और यह कदम उनके लिए आशा जगाने वाला साबित हुआ है। यदि सुप्रीम कोर्ट पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर लेता है, तो अनेक शिक्षकों को टीईटी पास करने के तहत आने वाले दबाव से मुक्ति मिल सकेगी।

टीईटी अनिवार्यता: एक संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार व शिक्षक पात्रता सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए एक संतुलित और संवेदनशील नीति बनानी होगी जो अनुभवी शिक्षकों की जरूरतों और सुरक्षा को भी महत्व दे। सरकारी निर्देशों का सही तरीके से पालन और शिक्षकों के सामूहिक हितों का सम्यक ध्यान ही इस संकट का समाधान कर सकता है।
सरकार को चाहिये कि टीईटी अनिवार्यता को लागू करते हुए अपवादात्मक उपाय भी करें, ताकि पुराने और अनुभवी शिक्षक भी अपने करियर में सुरक्षित महसूस कर सकें। इसके साथ ही व्यापक प्रशिक्षण और सहायता कार्यक्रम भी चलाए जाने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार का सुप्रीम कोर्ट में टीईटी अनिवार्यता के आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल करना शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा। यह कदम न केवल शिक्षकों की चिंता को दूर करेगा, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा। शिक्षक वर्ग के लिए यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है जहां उनका अनुभव और योग्यता दोनों समान रूप से सम्मानित हों।
आगामी दिनों में सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में दिए जाने वाले निर्णय पर संपूर्ण उत्तर प्रदेश व शिक्षक समुदाय की नजर बनी रहेगी।