कुमार की नई फिल्म JOLLY LLB 3 19 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है। यह सुभाष कपूर निर्देशित मुकदमेबाज़ हास्य-नाटकीय श्रृंखला का तीसरा भाग है, जिसमें पहले भाग (2013) में अरशद वारसी और दूसरे भाग (2017) में अक्षय कुमार ही लीड भूमिका में थे। अब दोनों ही ‘जॉली’ एक साथ बड़े पर्दे पर लौट रहे हैं, जिसके लिए दर्शक पहले से ही उत्साहित हैं। पिछले दोनों फिल्मों को समीक्षकों की प्रशंसा और अच्छा बॉक्स ऑफिस मिला है, इसलिए इस फ्रैंचाइज़ी को लेकर उम्मीदें बहुत बड़ी हैं। निर्माताओं ने फिल्म के प्रचार में जोर दिया है कि यह एक मनोरंजक कोर्टरूम ड्रामा होगा, जिसमें सामाजिक संदेश के साथ हास्य का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा।
फिल्म की पृष्ठभूमि और फ्रैंचाइज़ी
जॉली LLB फ्रैंचाइज़ी की यह तीसरी कड़ी है। पहले दो भागों में मुख्य किरदार न्याय और भ्रष्टाचार पर आधारित मुकदमेबाज़ कहानियाँ थीं। पहले भाग में अधिवक्ता जगदीश्वर “जॉली” त्यागी (अरशद वारसी) की कहानी थी, जबकि दूसरे भाग में जगदीश्वर “जॉली” मिश्रा (अक्षय कुमार) केंद्र में थे। दोनों ही फिल्मों में लॉ-कॉमेडी शैली के साथ समाज के कानूनी परिवेश पर तीखा व्यंग्य दिखाया गया था। तीसरे भाग में दोनों जॉली एक साथ कोर्टरूम में भिड़ेंगे, जो इस श्रृंखला के लिए बड़ा आकर्षण है। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि जॉली LLB एक लोकप्रिय फ्रैंचाइज़ी है और इस बार अक्षय कुमार व अरशद वारसी के साथ लौटने से इस फिल्म की अपील और बढ़ गई है।
JOLLY LLB 3 कहानी का सारांश (बिना स्पॉइलर के)
फिल्म की कहानी राजस्थान के एक छोटे गाँव पारसौल से शुरू होती है। यहां एक किसान राजाराम सौलंकी की जमीन से जुड़े एक बड़े प्रोजेक्ट को लेकर झगड़ा हो जाता है, जिसमें वह अपनी जमीन बचाने की कोशिश में विफल रहता है। इसी घटना के बाद राजाराम आत्महत्या कर लेता है, और उसकी विधवा पत्नी जानकी (सीमा बिस्वास) न्याय के लिए लड़ने का फैसला करती है। मामला दिल्ली की अदालत तक पहुँच जाता है, जहां दो छोटे शहरों के वकील, अक्षय कुमार और अरशद वारसी, आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। दोनों ही वकीलों का नाम “जॉली” है – जगदीश्वर “जॉली” मिश्रा (अक्षय कुमार) और जगदीश्वर “जॉली” त्यागी (अरशद वारसी) – और वे सिस्टम के विरुद्ध लड़ते नजर आते हैं।
यह एक कोर्टरूम ड्रामा है जिसमें हास्य के साथ गंभीर सामाजिक मुद्दों को उजागर किया गया है। प्रोमोशन में बताया गया है कि फिल्म की कहानी “असली जॉली बनाम नकली जॉली” के बीच कानूनी जंग के इर्द-गिर्द घूमती है। रोमांच और कोर्टरूम याचिकाओं के बीच दर्शकों को बिना मुख्य ट्विस्ट का खुलासा किए हुए न्याय की लड़ाई दिखायी जाएगी। कुल मिलाकर, कहानी में न्याय, भ्रष्टाचार और ईमानदारी जैसे विषय हैं, जिन्हें ह्यूमर और तीखे संवादों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
मुख्य पात्रों का प्रदर्शन
इस फिल्म में तीनों लीड कलाकार – अक्षय कुमार, अरशद वारसी और सौरभ शुक्ला – अपने-अपने पात्रों में कमाल का अभिनय करते दिखे हैं।
- अक्षय कुमार (जगदीश्वर “जॉली” मिश्रा): अक्षय ने लॉ-कॉमेडी शैली में सहज रूप से ढलते हुए अपने किरदार की खूब जान डाली है। उन्हें स्क्रीन पर काफी समय मिला है, और उन्होंने भूमिका को प्रभावित करने वाले दृश्यों में दमखम से निभाया है।
- अरशद वारसी (जगदीश्वर “जॉली” त्यागी): अरशद ने भी बराबर की ताकत का प्रदर्शन दिया है। वह अपनी कॉमिक टाइमिंग और भावपूर्ण अभिनय के साथ माहौल में चार-चाँद लगा देते हैं।
- सौरभ शुक्ला (जस्टिस सुंदरलाल त्रिपाठी): न्यायाधीश त्रिपाठी के रोल में सौरभ शुक्ला एक बार फिर ‘तीसरे हीरो’ की तरह उभरते हैं। उनका अभिनय बेहद प्रभावशाली है और कोर्टरूम सीन्स में वे फिल्मों की जान बन जाते हैं।
अन्य सहायक कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाएँ अच्छी तरह निभाईं। गजराज राव खलनायक के तौर पर प्रभावशाली दिखे, सीमा बिस्वास (जानकी) ने अपने परिवीक्षकों को भावपूर्ण अंदाज़ में रुला दिया, और राम कपूर ने विपक्षी वकील की भूमिका में जमीनी अभिनय किया। हालांकि हुमा कुरैशी और अमृता राव की भूमिकाएँ अपेक्षाकृत छोटी हैं, किंतु उनका आकर्षक अंदाज़ दर्शकों को याद रहेगा। कुल मिलाकर, मुख्य कलाकारों का मिलाजुला प्रदर्शन फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।
निर्देशन और पटकथा
फिल्म के निर्देशक सुभाष कपूर ने फिर से सामयिक कहानी को मनोरंजक अंदाज में पेश किया है। उनकी पटकथा में हास्य और गंभीर दृश्यों का संतुलन बना हुआ है। समीक्षकों के मुताबिक, कहानी सामाजिक रूप से प्रासंगिक है और इसमें व्यंग्य के साथ संवेदनशील क्षण भी हैं। संवाद विशेष रूप से उभारने वाले बने हैं, जिन्हें दर्शकों ने अच्छी प्रतिक्रिया दी है।
निर्देशन की बात करें तो कपूर ने कोर्टरूम सीन्स और भावपूर्ण दृश्यों को प्रभावी तरीके से रचा है। पहले हिस्से में थोड़ी सुस्ती महसूस हो सकती है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है कोर्टरूम की लड़ाई और डायलॉग दृश्य मनोरंजन बनाए रखते हैं। उनका यह अंदाज फिल्म को प्रामाणिक बनाता है और दर्शकों को बांधे रखता है।
संगीत और बैकग्राउंड स्कोर
संगीत की बात करें तो फिल्म के गाने औसत दर्जे के हैं और खास प्रभाव नहीं छोड़ते। इनके बोल तथा मेलोडी उतनी यादगार नहीं है जितना कोमल कॉमेडी-ड्रामा के लिए अपेक्षित होता। हालांकि, फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर (संगीत) इसके न्यायालयीन माहौल में काफी उपयुक्त है। मंगेश ढाकड़े द्वारा रचित बैकग्राउंड म्यूज़िक संवेदनशील और सूक्ष्म है; यह संवादों और कोर्टरूम के रोमांच को बाधित नहीं करता और पूरे माहौल को जीवंत रखता है।
सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग
रंगाराजन रामाबद्रन की सिनेमैटोग्राफी को समीक्षकों ने सिनेमाई बताया है। उनकी कैमरा वर्क फिल्म के ग्रामीण और शहरी दोनों सेटिंग को खूबसूरती से पेश करता है। विज़ुअल शॉट्स यथार्थवादी हैं और एक मजबूत दृश्य प्रभाव बनाते हैं।
एडिटिंग (चंद्रशेखर प्रजापति) साफ-सुथरी है। फिल्म की लंबाई को देखते हुए कट सहज हैं, लेकिन कुछ समीक्षकों ने महसूस किया है कि पहले भाग में गति थोड़ी धीमी रही। यदि पहले अर्ध में कुछ दृश्यों को और संक्षिप्त किया गया होता तो कथानक तेज़ी से आगे बढ़ता और पहले भाग की रफ़्तार बेहतर होती। कुल मिलाकर, तकनीकी पक्ष मजबूत है, हालांकि एडिटिंग के मामले में पहले हिस्से में थोड़ा सुधार किया जा सकता था।
फिल्म की विशेषताएँ और कमजोरियाँ
विशेषताएँ:
- तीखा व्यंग्य और Courtroom ड्रामा: फिल्म में हास्य के साथ सामाजिक व्यंग्य का समावेश है, जो दर्शकों को बांधे रखता है।
- बेजोड़ अभिनय: मुख्य कलाकारों (अक्षय, अरशद, सौरभ) के अभिनय ने फिल्म की जान बचाई है; उनके बीच की रसायनिक बॉन्डिंग और संवाद आदान-प्रदान फिल्म को जीवंत बनाते हैं।
- मजबूत पटकथा: संवाद तगड़े हैं और पटकथा में न्याय, भ्रष्टाचार जैसे सामाजिक मुद्दे अच्छे से पिरोए गए हैं।
- ऑल-स्टार कॉम्बिनेशन: फ्रैंचाइज़ी के पुराने किरदार वापस आ गए हैं (सीमा बिस्वास, गजराज राव आदि), जिससे पुरानी यादें ताज़ा होती हैं।
कमजोरियाँ:
- धीमा प्रारंभ: कई समीक्षकों ने कहा है कि फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी है। पहले हाफ के कुछ दृश्य लंबे खिंचे हुए लगे जिससे गति गड़बड़ हो गई।
- गाने कमजोर: संगीत केवल बैकग्राउंड स्कोर तक ही सीमित लगता है; फिल्म के गीत औसत दर्जे के हैं और ज्यादा याद नहीं रहते।
- उप-पात्र सीमित भूमिका: हुमा कुरैशी और अमृता राव के पात्रों को पूरी क्षमता से उपयोग नहीं किया गया, उनके आर्क बहुत छोटे हैं। फिल्म में थोड़ी अधिक कॉमिक टाइमिंग या नयी मोड़ जोड़कर मज़ाकिया पल और जोड़े जा सकते थे।
- दूसरे खलनायक का कम उभार: गजराज राव द्वारा निभाए गए खलनायक चरित्र को और प्रभावी तरीके से दिखाया जा सकता था; कुछ समीक्षकों ने इस चरित्र की वापसी में और गोता लगाने की कमी पाई है।
सामाजिक संदेश और प्रासंगिकता
इस फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण इसके सामाजिक संदेश हैं। कहानी के केंद्र में एक किसान और उसकी जमीन का झगड़ा है, जो भारत में भूमि विवादों और किसानों की दुर्दशा पर लाइट डालता है। समीक्षकों ने नोट किया है कि फिल्म “गंभीर सामाजिक मुद्दों को तीखे व्यंग्य और हास्य के साथ मिलाती है”। ट्रेलर रिलीज़ पर सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं में भी यह बात उभरी: एक यूजर ने लिखा, *“फिल्म में कॉमेडी, हार्ड-हिटिंग डायलॉग, ड्रामा, सामाजिक संदेश और मनोरंजन सभी कुछ है”*। यह दर्शाता है कि कहानी केवल कोर्टरूम की लड़ाई नहीं है बल्कि उसमें समकालीन सामाजिक चुनौतियाँ भी शामिल हैं।
इसके अलावा, फिल्म का सेटअप भूमि अधिकार, भ्रष्ट प्रशासन और न्यायपालिका पर सवाल उठाता है। आलोचकों ने इसे “शक्तिशाली संदेश” वाला बताया है। यहां तक कि प्री-पब्लिक इवेंट्स में अक्षय कुमार ने भी सामाजिक मुद्दों पर पहल की: कानपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा “गुटका नहीं खाना चाहिए”, जो एक अलग सामाजिक संदेश के रूप में वायरल हुआ। कुल मिलाकर, फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है कि कैसे आम आदमी के हक़ और न्याय की लड़ाई लड़ने वाले चरित्र दिखाए गए हैं।
दर्शकों की प्रतिक्रियाएं और समीक्षाएं
रिलीज़ से पहले और शुरुआती स्क्रीनिंग के बाद मिली समीक्षाएं ज्यादातर सकारात्मक रही हैं। दर्शकों ने सोशल मीडिया पर फिल्म की तारीफ़ करते हुए इसे “पैसा वसूल” बताया। टाइम्स ऑफ इंडिया के लाइव अपडेट के मुताबिक, फिल्म को “रैव समीक्षाएं” मिली हैं और दर्शक इस नए कॉम्बिनेशन को पसंद कर रहे हैं। ट्विटर पर भी फैंस ने फिल्म के मज़ेदार संवादों, सामाजिक पैमाने वाले विषय और मनोरंजन के तत्वों की प्रशंसा की है।
उदाहरण के लिए, एक दर्शक ने ट्वीट किया, “#JollyLLB3 अक्षय कुमार की इन वर्षों की सबसे बेहतरीन फिल्म है। ये लगभग त्रुटिहीन है!!! अक्षय, अरशद और सौरभ ने पिछली दोनों फिल्मों की तरह उम्मीदों पर खरा उतरा।” एक अन्य यूज़र ने फिल्म को 4/5 स्टार देते हुए लिखा, “यह विजेता है! मज़ेदार पटकथा, तीखे संवाद और पावरफुल परफॉर्मेंस इसे देखने लायक बनाते हैं”।
प्रमुख फिल्म समीक्षक टारन आदर्श ने भी फिल्म की प्रशंसा की है, उन्होंने इसे “POWERFUL” बताया और लिखा, “#JollyLLB3 पूरी पैकेज है — इसमें ह्यूमर, सटायर, ड्रामा, इमोशंस और दिल को छूने वाला संदेश है… यह #JollyvsJolly क्लैश बेहद मनोरंजक है।”।
Trade विश्लेषक भी पॉजिटिव हैं; उनके अनुसार जॉली LLB 3 को धीरे-धीरे वर्ड-ऑफ-माउथ से बढ़ने की उम्मीद है। बॉक्स ऑफिस ट्रेड पैटर्न के मुताबिक फिल्म शुरुआती सप्ताहांत में औसत प्रदर्शन कर सकती है, लेकिन दर्शकों के बढ़ते रुझान से संकेत मिलता है कि यह अच्छी कमाई कर सकती है।
निष्कर्ष और रेटिंग
निष्कर्षतः, Jolly LLB 3 एक मनोरंजक कोर्टरूम ड्रामा है जिसमें फ्रैंचाइज़ी की पुरानी यादें और नया जोश दोनों हैं। फिल्म में मजबूत स्टारकास्ट, मज़ेदार संवाद और सामाजिक संदेश का अच्छा संतुलन है। हालांकि पहली छमाही थोड़ी स्लो है और गाने उतने आकर्षक नहीं, लेकिन दूसरे हाफ में कोर्टरूम की लड़ाई और नॉस्टैल्जिया देखने लायक है।
समीक्षकों ने इसे मिलेजुले रूप से सकारात्मक रेटिंग दी है; बॉलीवुड हंगामा ने इसे 3.5/5 दी है और लिखा कि फिल्म ‘हास्य, भावनाएँ, कड़े संवाद और ड्रामा’ से भरी है, तथा मुख्य कलाकारों ने शो चुरा दिया है। Pinkvilla ने भी 3.5/5 की रेटिंग देते हुए कहा कि मनोरंजन के लिहाज से फिल्म सफल है।
रेटिंग: 3.5/5 (अनुमानित)
कुल मिलाकर, अक्षय कुमार की यह नई फिल्म जॉली LLB 3 फ्रैंचाइज़ी के प्रशंसकों और आम दर्शकों दोनों के लिए एक दिलचस्प और मनोरंजक पेशकश है। यह हास्य और सामाजिक जागरूकता का संगम पेश करती है, जो पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए नई ऊर्जा प्रदान करती है।
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